संदेश

गरीबी

चाँदी के सपनो में आँखो का खुलना,
सोने सी साँसो में प्रेम का बसना,
इतनी महँगाई है इस ज़माने में,
तो तुम और मैं ग़रीब कैसे..बादलों की ऊँचाई में छुपते हैं इंद्रधनुष,
हीरों से रंगो को बसाए
ईश्वर की इस महँगी कलाकारी में,
तो तुम और मैं ग़रीब कैसे....मन्द्यम सी सिक्कों की खन खन सी बारिश की बूँदों में,
नोटों की चाहत की माटी की ख़ुशबू में,
मन का उल्लास हवा में उछाल मारता है,
ऐसी महेंगी ख़ुशी में
तुम और मैं ग़रीब कैसे...सागर के ख़ज़ाने से शांति का बहाव,
चिड़ियों के घोंसले में भी होता रिसाव,
महँगे बड़े है जीवन के पल,
साँसो से ख़रीदते,
तो फिर तुम और मैं ग़रीब कैसे...ब्रह्माण्ड की ऊर्जा स्रोत के आबाँटन में
जितना तेरा है उतना मेरा है
जिस महँगे जीवन को तूने ढाला
उसी महँगे जीवन को ग़रीब सा मैंने पाला
तेरी अँगड़ाइयों में
मैं अपने लाचारी का आलस खोता हूँ
और इस ईश्वर प्रदत्त महँगे जीवन को सस्ता समझ
जीता हूँ
अपने भाग्य का रोना अपने आलस के बलबूते पर रोते
की तेरी महँगाई मेरी महँगाई से कम ज़्यादा क्यूँ हैं
तेरी साँसो की गिनती मेरे सोने से साँसो से ज़्यादा क्यूँ है
वैमनस्य पाले घूमता हूँ
ये अनुबोध के अभाव का…

चित्र

विकचित्र एक विचित्र,
कुछ विचार पूरित कुछ स्वयं अंकित,
कई बार कुछ बनाने को, अपनी कूची उठाने को,
हाथ उठते हैं थम जाते हैं, ये सोच कर,
की आग की लपटों से चित्र बनाने से,
और अंगारों की कुचियाँ चलाने से,
कही पन्नो की क्षमता ह्रास न हो जाये,
उनमें प्रकाश समाहित जो होता है,
उसके परिवर्तन से पन्नों पर
कही मैं कुछ ज्वलंत न बना डालू,
कही कुछ मुझ से जल न जाये,
अलग अलग रंगों की लपटों को
अलग अलग कुचियों से लपेट
जब पन्नो पर बनती रेखाएं
एक आकार जलाती हैं,
कई आनंद हृदय से दूर,
किसी अनंत अँधियारे में
अकुलाती सी
स्वास पूरी करने का प्रयास करती
जब स्वर्गीय होती हैं,
कुछ फिर जल उठता है,
कुछ और उकेरने को
फिर कुचियाँ उठाता है।
और फिर कुछ पन्ने जलने को पीड़ित होते हैं।।
जब घोर घनी दुख की बदली छाती है,
तुम मन बांध के धैर्य से किसी वृक्ष तले,
वर्षा थमने का इंतज़ार करो।
नही होता है कुछ भी झटके से,
तुम अपने को नियंत्रित रखो।
जब डूबती है नौका तब
घबराने से कुछ होता नही,
तुम धैर्य को नौका बना के,
धीरे धीरे समंदर पार करो।।
बहुत कठिनाइयों से मिलता है जीवन,
कठिनाइयों से लड़ आगे बढ़ो।।।
क्या करूँ अब समझ आता नही,
दायरा सोच का अब गहराता नही,
किस मोड़ पर छोड़ा है अब मेरी गलतियों ने,
सुधारने का रास्ता नज़र आता नही,
किसी की खुशियों और दुख का कोई अंत तो हो,
इसका अब जवाब मिल पाता नही,
तुम्हे मेरी गलतियों की सजा न मिले,
इतना भी में खुद से कह पाता नही,
तेरी बददुवाएं भी मैं स्वीकार करता हूँ,
की मेरा खुशियों से कोई वास्ता नही।।

A Gift

चित्र
में मेरे भीतर का उन्माद लिए घूमता हूँ,
अकेला हूँ मैं कई स्वपन बर्बाद लिए घूमता हूँ,
जब चमक के विचार का एक व्यवहार से पाता हूँ,
आज मैं व्यवहार का वो स्वाद लिए घूमता हूँ,
अकेले ही दिल के कई ख़यालात लिए घूमता हूँ,

song of my short film